Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

भासपा से गठबंधन के ऐलान के साथ भाजपा ने मजबूत की जातीय गोलबंदी

 Tahlka News |  2016-07-09 14:22:44.0

shah rajbhar

उत्कर्ष सिन्हा  

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनावो के मद्देनजर शनिवार को भारतीय जनता पार्टी और पूर्वांचल के 3 जिलों में जातीय आधार पर अपना प्रभाव रखने वाली भारतीय समाज पार्टी का गठबंधन हो गया. भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर का दावा है कि इलाके की 125 सीटों पर उनके प्रभाव से भाजपा गठबंधन को चुनावी फायदा होगा.

मऊ जिले में आयोजित महापंचायत में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में भासपा और भाजपा के गठबंधन का औपचारिक ऐलान हुआ. भासपा नेताओं का दावा है कि भाजपा ने उन्हें 25 सीटे देने का वादा किया है.


कभी कांसीराम के सिपहसलार रहे ओम प्रकाश राजभर ने बसपा छोड़ने के बाद सन 2001 में सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी की स्थापना की थी.इसके बाद समय समय पर होने वाले चुनावो में भासपा  अलग अलग गठबन्धनो के साथ चुनावी मैदान में उतरी. बनारस से ले कर बहराईच तक के जिलों में राजभर समुदाय की मौजूदगी है मगर बलिया,गाजीपुर और मऊ जिलों की कई सीटों पर राजभर वोटो की निर्णायक ताकत है.

जातीय गडना के अनुसार लगभग 2 फ़ीसदी वोट वाले राजभर समुदाय की झंडाबरदार होने का दवा करने वाली भासपा ने 2012 का विधान सभा चुनाव 52 सीटों पर मुख़्तार अंसारी की पार्टी से गठबंधन कर लड़ा था. हलाकि इन चुनावो में वह एक भी सीट नहीं जीत पायी मगर उसके प्रत्याशियों को लगभग 5 फ़ीसदी वोट मिले थे. कई सीटे ऐसी भी थी जहा भासपा को 50 हजार से ज्यादा वोट मिले थे.

भाजपा और बसपा के इस गठबंधन से सबसे ज्यादा नुक्सान बसपा को पहुचने की उम्मीद है. राजभर का दावा है कि भाजपा के साथ आ जाने से इस इलाके की 125 सीटों पर उनका गठबंधन जीतेगा.

कुछ महीने पहले बहराईच में अमित शाह ने राजा सुहैल देव की प्रतिमा का अनावरण कर राजभर समुदाय को हिंदूवादी खेमें में लाने का प्रयास शुरू किया था. शनिवार को भी मुस्लिम सिपहसलार गाजी पर राजा सुहैलदेव की जीत का जिक्र करते हुए उन्होंने इसी लाईन को आगे बढाया.

हलाकि इस रैली के बीच ही झंडा और टोपी को ले कर भासपा और भाजपा के कार्यकर्ताओं में अच्छा खासा संघर्ष हो गया. नौबत यहाँ तक पहुची कि सभा के बीच ही भासपा कार्यकर्ताओं ने भाजपा मुर्दाबाद के नारे भी लगा दिए.

ओम प्रकाश राजभर अपने जातीय वोटो की ताकत पहचानने वाले नेता माने जाते हैं. आम तौर पर चर्चा से बाहर रहने वाली इस पार्टी की चर्चा चुनावो के वक्त बढ़ने की कला वे बखूबी जानते हैं और इस बार भी ओम प्रकाश राजभर ने मौके को भुनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी.

वही दूसरी तरफ भाजपा ने भी बिहार चुनावो में जातीय गोलबंदी न करने का खामियाजा उठाने के बाद यूपी में सबक लिया है. नरेन्द्र मोदी के जादू के साथ साथ उसकी नजर यूपी  के जातीय समीकरण पर भी है ऐसे में भासपा के साथ गठबंधन कर उसने पूरब की सीटों पर अपने समीकरण ठीक करने की कोशिश की है.



Tags:    

  Similar Posts

Share it
Top