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सुलगने लगा योगी समर्थको का गुस्सा, सम्हालने में जुटी भाजपा

 Tahlka News |  2016-07-07 12:39:54.0

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उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. कट्टर हिंदूवादी नेता और भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ के समर्थको में मोदी मंत्रिमंडल के ताजा विस्तार के बाद नाराजगी बढ़ने लगी है. इन समर्थको को यह लगने लगा है कि भाजपा योगी का लाभ तो लेने में लगी है मगर उन्हें सम्मान देने में हर बार पीछे हट जाती है.

यूपी में मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने के लिए योगी समर्थक कई महीनो से सक्रिय है. फैजाबाद से ले कर गोरखपुर तक “योगी नहीं तो भाजपा को वोट नहीं” के नारों से होर्डिंगे लगायी गयी. योगी के निजी संगठन हिन्दू युवा वाहिनी ने योगी के समर्थन में बाकायदा मुहीम छेड़ रखी है, मगर अब उनके समर्थक खुद योगी के प्रभाव वाले गोरखपुर में ही योगी के पर कतरने की कोशिशों की चर्चार्ये करने लगे हैं.


योगी समर्थको की नाराजगी पहली बार तब सामने आई जब गोरखुर के ही शिव प्रताप शुक्ल को राज्यसभा में भेजा गया. शिवप्रताप से योगी की खिलाफत रही है. गोरखपुर विधान सभा से जीतने वाले शिवप्रताप शुक्ल को योगी ने ही हिन्दू महासभा का टिकट दे कर राधा मोहन दास अग्रवाल के हांथो पराजित करा दिया था. तब से शिव प्रताप शुक्ल चुनावी राजनीती में हाशिये पर चले गए.

शिवप्रताप को पहले विधान परिषद् भेजने की योजना थी मगर नामांकन के दिन ही अचानक पार्टी ने शिवप्रताप शुक्ल को राज्यसभा भेज दिया. इससे योगी समर्थको को बड़ा झटका लगा. नाराजगी का आलम यह था कि शिवप्रताप शुक्ल के नामांकन में पार्टी की गोरखपुर इकाई ही नदारत रही.

इसके बाद योगी समर्थको को इस बात की उम्मीद थी कि या तो योगी को केंद्रीय मंत्र मंडल में लिया जायेगा या फिर उनके नाम को मुख्यमंत्री के रूप में घोषित कर दिया जायेगा. इस बीच पूर्वांचल की जन सभाओं में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मंच से ही योगी की तारीफे भी की. समर्थको को लगा कि योगी का कद बढ़ने के लिए उन्हें मंत्रिपरिषद में जरूर लिया जायेगा . मगर 5 बार के सांसद होने के बावजूद भी योगी को मंत्री का पद नहीं मिला.

जुलाई में ही प्रधानमंत्री का गोरखपुर में कार्यक्रम होना निश्चित है. गोरखपुर में प्रस्तावित एम्स की जमीन को ले कर बड़ी सियासत हुयी है. योगी लगातार इसे खाद कारखाने की बची जमीन पर लगवाने के लिए कहते रहे हैं. मगर इसी बीच योगी द्वारा ही राजनीति में लाये गए और बाद में उनसे दूरी बनाने वाले डा. राधा मोहन दास अग्रवाल ने इसमें एक नया पेंच फंसा दिया है. अग्रवाल ने एम्स के लिए देवरिया रोड पर बंद पड़े गन्ना शोध संस्थान का प्रस्ताव कर दिया है और पीएमओ ने इसका विवरण भी मांग लिया है.

अब अगर एम्स के लिए गन्ना शोध संस्थान की जमीन चुन ली जाती है तो यह भी डा. अग्रवाल के सामने योगी की हार मानी जाएगी.

ऐसे में योगी समर्थको में उबल आना तय है. दरअसल योगी की उग्र और कट्टर हिंदुत्व की छवि और उनके प्रभाव वाले एक क्षेत्र में मिलने वाला लाभ तो भाजपा लेना चाहती है मगर साथ ही उन्हें सीएम का चेहरा बनाने को ले कर पशोपेश में भी है. साथ ही योगी का निजी संगठन हिन्दू युवा वाहिनी भी पार्टी के लिए हमेशा चिंता का कारण रही है. हिन्दू युवा वाहिनी योगी के लिए इतनी प्रतिबद्ध है कि लोकसभा चुनावो के पहले जब नरेन्द्र मोदी की गोरखपुर रैली में योगी को होर्डिंग्स पर जगह नहीं मिली थी तब हिन्दू युवा वाहिनी ने होर्डिंग्स तक फाड़ दी थी.

अब एक तरफ भाजपा योगी को नियंत्रित रखते हुए उनका उपयोग करना चाहती है तो वही योगी और उनके समर्थक योगी को अब मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के लिए पार्टी पर दबाव बढ़ने में और भी सक्रिय हो गए हैं

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