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दरोगा भर्ती-2011 में यूपी सरकार को बड़ा झटका

 Tahlka News |  2016-03-16 17:06:31.0

a1- क्षैतिज आरक्षण का लाभ सामान्य श्रेणी में देने तक चयन निरस्त
- क्षैतिज आरक्षण के लाभार्थियों का अपने श्रेणी में समायोजन का निर्देश
- गलत चयन प्रक्रिया के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड पर 2.80 हजार हर्जाना


तहलका न्यूज ब्यूरो
इलाहाबाद, 16 मार्च. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दरोगा व प्लाटून कमांडर भर्ती-2011 में क्षैतिज आरक्षण का लाभ नियमों के विपरीत देते हुए सामान्य श्रेणी में देने को गलत करार दिया है। कोर्ट ने कहा है कि क्षैतिज आरक्षण का लाभ वर्टिकल आरक्षण नहीं होता ऐसे में इस विशेष आरक्षित कोटे के अभ्यर्थियों को केवल सामान्य वर्ग में चयनित कर रखना अवैध है। कोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड व राज्य सरकार को विशेष कोटे की महिला, पूर्व सैनिक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रितों को सामान्य व आरक्षित वर्ग में श्रेणीवार समायोजित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इसी के साथ क्षैतिज आरक्षण का लाभ सामान्य श्रेणी में देने तक दरोगाओं के चयन को निरस्त कर दिया है।

कोर्ट ने आरक्षण नियमों का पालन न करने पर राज्य सरकार व पुलिस भर्ती बोर्ड पर दस हजार प्रति याचिकाकर्ता कुल लगभग 2 लाख 80 हजार रूपये का हर्जाना लगाया है तथा प्रमुख सचिव गृह को हर्जाना राशि चार हफ्ते में महानिबंधक के समक्ष जमा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने नये सिरे से श्रेणीवार समायोजन मेरिट सूची के आधार पर नीचे से करने का निर्देश देते हुए कहा है कि समायोजन से जो पद खाली रह जायेंगे वे अगली भर्ती में भरे जायंेगे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि हर्जाना राशि को जवाबदेह भर्ती बोर्ड के अधिकारियों के वेतन से वसूली करने का भी आदेश दिया है।

28 याचिकाओं को स्वीकार कर दिया आदेश
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने आशीष कुमार पाण्डेय व कई अन्य याचिकाओं के 28 याचियों की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया है। 19 मई 2011 को 3698 दरोगा व 312 प्लाटून कमांडर की भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था। जब परिणाम घोषित हुआ तो विशेष कोटे के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग के कोटे में लाभ दे दिया गया। इस प्रकार 77 फीसदी सीटों का आरक्षण दे दिया गया। कोर्ट ने इसे शासनादेश व सुप्रीम कोर्ट के इन्द्रा साहनी केस के खिलाफ माना। कोर्ट का कहना था कि 50 प्रतिशत से अधिक पदों को आरक्षित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं की विशेष श्रेणी को सामान्य व आरक्षित वर्ग में कोटे के तहत चयनित किया जाना चाहिए था। ऐसा न करना अनुच्छेद 162 का उल्लंघन है। महिलाओं को 20 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गयी है। इसके तहत 740 महिलाओं की भर्ती होनी थी। 261 ही उपलब्ध थी जिसमें से 19 पिछड़े वर्ग व एससी में है। 242 महिलाओं को श्रेणीवार चयनित करना था।

क्या कहा कोर्ट ने
कोर्ट ने कहा कि 261 महिलाओं में से 78 सामान्य, 173 पिछड़ा वर्ग, 10 एससी में चयनित करना था। ऐसा न कर सभी को सामान्य वर्ग में समायोजित करना गलत था। कोर्ट ने महिला अभ्यर्थियों को श्रेणीवार समायोजन का निर्देश दिया है। जो पद खाली होंगे उन्हें अगली भर्ती में शामिल किया जाए। कोर्ट ने 25 जून 15 की चयन सूची में विशेष कोटे को सामान्य कोटे में शामिल करने के आदेश को रद्द कर दिया है। जिन पुरूष अभ्यर्थियों के स्थान पर महिला या अन्य विशेष कोटे का चयन होगा ऐसा पुरूष अभ्यर्थियों का चयन निरस्त हो जायेगा। कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों का समायोजन के बाद प्रशिक्षण के लिए भेजने का भी निर्देश दिया है।

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