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पिक्चर अभी बाकी है... कल दिख सकता है अंतिम दृश्य

 Tahlka News |  2016-12-31 11:40:01.0

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उत्कर्ष सिन्हा

लखनऊ. लगभग 70 घंटे तक चले समाजवादी पार्टी के दंगल के मेगा एपिसोड के बाद भले ही यह माना जा रहा है कि सारे मसले हल हो गए हैं मगर अखिलेश खेमे के रणनीतिकार नतीजे को पुख्ता करने के लिए कोई कोना नहीं छोड़ना चाहते. इसीलिए मुलायम और अखिलेश की मुलाकात के बाद भी 1 जनवरी को बुलाये गए ‘राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मलेन” को रद्द नहीं किया गया है. इस सम्मलेन के बाकायदा अपने निर्धारित समय और स्थान पर होने की सूचना मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी आवास 5 कालिदास मार्ग पर लगे लाऊड स्पीकर लगातार प्रसारित कर रहे हैं.


शनिवार की सुबह कालिदास मार्ग बनाम विक्रमादित्य मार्ग पर चले शक्ति प्रदर्शन का नतीजा एकतरफा रहा. हालाकि अखिलेश यादव इस परिस्थिति से दुखी भी दिखे. मीटिंग हाल में जुटे पार्टी के 198 विधायको और प्रत्याशियों के बीच भावुक होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति नहीं हो सकती कि नेता जी जैसे कद्दावर व्यक्ति के सामने इस तरह की विषम स्थिति पैदा करा दी गयी. और पूरे मामले को मुलायम के विरुद्ध अखिलेश में तब्दील करने की कोशिश की गयी.

इस बीच आजम खान के साथ जब मुख्यमंत्री अखिलेश मुलायम सिंह से मिलने के लिए गए तब भी बातचीत का मुद्दा पार्टी से बर्खास्त किये गए अखिलेश समर्थको की वापसी, मुख्यमंत्री पद का चेहरा और प्रत्याशियों की सूची ही रही.
अखिलेश खेमा अब कतई नहीं चाहता कि प्रदेश अध्यक्ष पद पर शिवपाल यादव किसी भी सूरत में बने रहे. अखिलेश खेमे का मानना है कि बीते दो महीनो में जिस तरह शिवपाल यादव ने अखिलेश समर्थको पर चुन चुन कर कार्यवाही की है उसके बाद अब उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता. इस बीच पार्टी की आधिकारिक वेब साईट से भी अखिलेश और रामगोपाल के निलंबन के पत्र हटा दिए गए मगर साथ ही साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर से शिवपाल का नाम भी हटा दिया गया है.

मुलायम सिंह द्वारा दोनों निलंबन वापस होने के बाद भी अखिलेश खेमा कल का सम्मलेन करने पर आमादा है.योजना है कि इसी सम्मलेन को आम सभा में तब्दील कर दिया जाए और वह आम सहमति से प्रस्ताव पास कर पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष या तो अखिलेश यादव या फिर उनके करीबी धर्मेन्द्र यादव को घोषित कर दिया जाय जिससे चुनावो के वक्त अस्पने प्रत्याशी को चुनाव चिह्न देने में कोई समस्या न रह जाए.

बैठक के बीच अखिलेश यादव ने जिस आत्म विश्वास से साईकिल चुनाव चिह्न पर ही लड़ने की बात की उससे भी यह तय हो गया कि टीम अखिलेश ने तकनीकी तौर पर खुद को बहुत मजबूत कर लिया है और सरकार के साथ साथ पार्टी पर भी उसका पूरा नियंत्रण है.

इस बीच समाजवादी पार्टी कार्यालय पर पहुंचे लगभग 17 विधायको और कुछ प्रत्याशियों से भी एक प्रोफार्मा भराया जा रहा था जिसमें मुलायम सिंह के प्रति उनकी निष्ठां की शपथ थी. मगर यह फार्म भरने वालो कि संख्या इतनी कम रही कि अब इसका कोई मतलब ही नहीं रह गया.

अपने समर्थको से मिलने के बाद अखिलेश यादव और प्रो. राम गोपाल यादव के बीच गोपनीय मंत्रणा चली और उसमे प्रत्याशियों की एक नयी सूची तैयार की जा रही है जिसे मुलायम सिंह की स्वीकृती के लिए भेजा जायेगा और फिर इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी.

अब सबकी निगाहे रविवार को होने वाले सम्मलेन पर टिकी हैं जहाँ से कई बड़े फैसले होने की उम्मीद है. 201 7 की पहली सुबह समाजवादी पार्टी के नए नेतृत्व और भविष्य के फैसले पर मुहर लगाने की गवाह बनेगी.

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