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एक से छह साल के सभी बच्चो को मिलेगी पेट में कीड़े मारने की दवा

 Sabahat Vijeta |  2016-08-09 18:21:39.0

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लखनऊ. आज यानी 10 अगस्त को राष्ट्रीय कृमिनाशक दिवस के रूप में मनाया जाएगा. जिसके तहत प्रदेश के 70 जिलों में एक वर्ष से छः वर्ष तक के बच्चो को आशा एवं आंगनवाड़ी के माध्यम से पेट में कीड़े मारने की दवा अल्बेन्डाज़ोल का सेवन करवाया जाएगा. इसी के साथ 6 से 19 वर्ष के जो बच्चे स्कूल जाते हैं उन्हें स्कूल में ही शिक्षकों के ज़रिये से यह दवा खिलाई जाएगी.


इसी वर्ग के स्कूल ना जाने वाले बच्चों को भी आशा एवं आंगनवाड़ी के माध्यम से पेट के कीड़े मारने की दवा खिलाई जाएगी. इसके लिए सभी हितभागियों को प्रदेश सरकार के माध्यम से प्रशिक्षित भी किया जाएगा.


राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से प्राप्त आंकड़े यह दर्शाते हैं कि प्रदेश में एक वर्ष से 19 वर्ष के बीच के 75 फीसदी बच्चे पेट के कृमि की शिकायत से ग्रसित हैं. भारत में सबसे अधिक संख्या में मिट्टी से प्रसारित होने वाले कृमि हैं जिन्हें हम स्वाइल ट्रांसमिटेड हेल्मेंथिस कहते हैं जो कि पूरे विश्व में सबसे अधिक संक्रमण का कारण हैं.


भारत में संक्रमण की दर को देखते हुए ही भारत सरकार ने पिछले साल सन 2015 फ़रवरी में जारी किये गए कृमि नाशक कार्यक्रम को विस्तृत करने का फैसला लिया है. पिछले वर्ष 9 करोड़ बच्चे इससे लाभान्वित हुए थे. इसके लिए सरकार ने अन्तराष्ट्रीय संस्था जैसे श्विश्व स्वास्थ्य संगठन का सहयोग लिया तथा मानव संसाधन मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास तथा जल विभाग का भी सहयोग लिया गया.


राष्ट्रीय स्तर पर इसे सभी स्कूल ना जाने वाले एवम स्कूल जाने वाले सभी बच्चो के साथ लागू किया जाएगा जिसमें प्रारंभिक तौर पर सरकार द्वारा एल्बेंडाजोल की गोली के वितरण एवं सेवन कराने का प्रयास किया जाएगा जबकी बाद की योजना साफ़ सफाई में सुधार पर केन्द्रित होगी.


केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कृमिनाशक कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा रहा है तथा वर्ष में दो बार चलाया जाता है प्रथम चरण में योजना सिर्फ 277 जिलो तक सीमित थी जिसे अब 536 जिलों तक बढ़ाया जाएगा.


विश्वभर में बड़ी संख्या में बच्चों में खून की कमी का कारण पेट में कृमि होना है जो कि एक बड़ी समस्या है जो सीधे तौर पर मस्तिष्क विकास को प्रभावित करती है. ज्यादातर पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में आयरन की कमी पाई जाती है जबकि दिमाग का विकास हो रहा होता है. डॉक्टरों के अनुसार पेट में कृमि होने से बच्चों में खून की कमी, पोषक तत्वों की कमी, मानसिक एवं शारीरिक विकास में रुकावट तथा लगातार पेट में दर्द रहने की शिकायत रहती है.


भारत जो कि विश्व में आर्थिक प्रगति की राह पर है, वहीँ यहाँ एक बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे भी है जिनका विकास बाधित है. उत्तर प्रदेश के सन्दर्भ में स्थिति और विकट है जहाँ न सिर्फ 50.4 फीसदी बच्चों का विकास बाधित है बल्कि 28.4 फीसदी बच्चे ऐसे है जिनका कि विकास अत्यंत बाधित है. इसका कारण उनका बार- बार डायरिया से ग्रसित होना है जो गंदे पानी द्वारा होता है.


इन मूलभूत आवश्यकताओं के आभाव में भारत में पांच वर्ष के अन्दर के 140,000 बच्चे डायरिया से ग्रसित होकर काल का ग्रास बन जाते हैं तथा 50 फीसदी कुपोषण के केस का सम्बन्ध डायरिया, साफ़ पानी का आभाव, साफ़-सफाई की कमी इत्यादि हैं.


भारत में खुले में शौच करने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है तथा शोध ये बताते है कि इसका सीधा प्रभाव विकास को बाधित करता है क्यों कि इसके कारण बहुत सी बीमारियाँ एवं संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है. भारत की कुल जनसँख्या में से 60 करोड़ लोग खुले में ही शौच जाते हैं जिससे उनमें अनेक प्रकार के संक्रमण, बीमारियों का खतरा बना रहता है.


भारत में बड़े पैमाने पर खुले में शौच के साथ बार-बार दस्त होना बच्चो में पोषक तत्वों के अवशोषण की क्षमता को प्रभावित करता है एवं शारीरिक तथा मानसिक विकास को बाधित करता है. साफ़ पानी, सफाई और स्वच्छता पोषण के महत्वपूर्ण निर्धारक हैं.

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