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सपा से बाहर हो चुके अखिलेशव‍ादियों का ये है नया ठिकाना

 Girish Tiwari |  2016-10-05 06:15:12.0

अब समाजवादी पार्टी ऑफिस नहीं जाएगी टीम अखिलेश!


तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ
: सत्तादल सपा का गृहयुद्ध अब नया मोड़ लेता जा रहा है। चाचा और भतीजे की अनबन से समाजवादी पार्टी दो खेमों में बंट गई है। लखनऊ से लेकर गांव-गांव तक पार्टी के कार्यकर्ता अब या तो अखिलेशवादी हैं या फिर शिवपालवादी हो गए हैं। सूत्रों की माने तो समाजवादी पार्टी से निष्कासित की जा चुकी टीम अखिलेश का नया ठिकाना जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट का नया दफ्तर होगा।


नवरात्र के शुभ मुहुर्त में सात बंदरिया बाग स्थित बंगले में जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट का दफ्तर शुरू होगा। इसके बाद टीम अखिलेश यहीं से चुनावी संचालन और सीएम अखिलेश यादव की ब्रैंडिंग पर काम करेगी। यह दफ्तर समाजवादी पार्टी मुख्यालय के ठीक पीछे है।


बता दें कि सपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद शिवपाल यादव ने टीम अखिलेश के कई सदस्यों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। न केवल उनका निष्कासन किया गया बल्कि सभी नेताओं के समाजवादी पार्टी दफ्तर में आने पर भी रोक लगा दी। यही नहीं सोमवार को सीएम के करीबी और समाजवादी छात्र सभा के पूर्व अध्यक्ष अतुल प्रधान का भी टिकट काट दिया गया।


राजेंद्र चौधरी होंगे उपाध्यक्ष
लगातार एक्शन से परेशान टीम अखिलेश ने अब नए सिरे से सीएम अखिलेश के लिए काम करने के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। सीएम अखिलेश यादव ने नए सिरे से जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट को एक्टिव करने का फैसला किया है। यह ट्रस्ट नवरात्र के बाद से काम करने लगेगा। जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट के अध्यक्ष अखिलेश यादव होंगे। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी उपाध्यक्ष होंगे। ट्रस्ट संचालन का जिम्मा मुख्य रूप से चौधरी ही उठाएंगे।


अखिलेश की ब्रैंडिंग पर होगा फोकस
इसके अलावा सुनील यादव साजन, नईमुल हसन और सांसद धर्मेन्द्र यादव ट्रस्ट के एक्टिव मेंबर होंगे। अब ट्रस्ट में भगवती सिंह और नारद राय जैसे पुराने नेता नहीं होंगे। 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए सीएम अखिलेश यादव का नया वॉर रूम भी यहीं से संचालित होगा। टीम अखिलेश का पूरा फोकस सीएम अखिलेश यादव की ब्रैंडिंग पर होगा। वह आडियो, विडियो, रेडियो से लेकर होर्डिंग और बैनर के जरिए ब्रैंडिंग पर काम करेगी।


पहले आवास के लिए लिया था भवन
इसके साथ ही एक हेल्पलाइन भी बनाई जाएगी, जिससे सीएम अखिलेश यादव तक कार्यकर्ता सीधे बात पहुंचा सकेंगे। जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट लोहिया के विचारों को आगे बढ़ाने और ट्रेनिंग देने पर भी काम करेगा। राज्य सम्पत्ति विभाग पहले सपा दफ्तर के पीछे वाला यह भवन अखिलेश यादव को बतौर पूर्व सीएम दे रहा था। बाद में अखिलेश ने चार विक्रमादित्य मार्ग को अपने लिए चुना। सात बंदिरया बाग वाले इस भवन में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग का दफ्तर चलता था। 2014 में इसे खाली करवा दिया गया। इस भवन की दीवारों पर समाजवादी नेताओं के चित्र भी बनाए गए हैं।


टीम अखिलेश की तैयारी अपने नेता की छवि के सहारे आगे बढ़ने की है, लेकिन इस तैयारी में वे शिवपाल यादव की समाजवादी पार्टी से कोई नाता नहीं रखना चाहते समाजवादी पार्टी अब तक डेढ़ सौ से अधिक उम्मीदवारों का टिकट फाइनल कर चुकी है। लेकिन अखिलेश यादव उन्ही नेताओं के लिए ‘मन’ से वोट मांगेंगे जो उनके ‘अपने’ है। समाजवादी पार्टी में एक लकीर तो खींच चुकी है। सबको पता है कौन इधर है और कौन उधर। बस इन्तजार है लकीर के ‘लक्ष्मण रेखा’ को लांघने की।


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