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फ़ोटोजर्नलिस्ट की मौत के बाद हटाई गई सियासी 'वाटर ट्रेन'

 Vikas Tiwari |  2016-05-09 18:05:26.0

IMG_20160509_174423 (2) तहलका न्यूज ब्यूरो


झांसी:  केन्द्र और प्रदेश सरकार की सियासत ने आखिरकर एक फोटो जर्नलिस्ट की जान ले ही ली है। इसका जिम्मेदार कौन होगा, केन्द्र या फिर प्रदेश सरकार। फिलहाल फोटो जर्नलिस्ट की मौत के बाद केन्द्र में बैठी मोदी सरकार चेती और 4 मई को झांसी आई वाटर एक्सप्रेस को झांसी से हटाने के निर्देश दिये। आदेश मिलने के बाद वाटर एक्सप्रेस को आगरा की ओर रवाना कर दिया गया है। इसके बाद अभी भी कन्फयूजन बरकार है कि आखिर इस ट्रेन को कहां रवाना किया गया है। इसका जवाब अभी तक किसी भी रेल अधिकारी ने पूछने पर नही दिया है।


पिछले चार दिनों से केन्द्र और प्रदेश की अखिलेश सरकार के लिए राजनीति का केन्द्र बिन्दु बनी वाटर एक्सप्रेस को आखिकर रवाना कर ही दिया गया। वह भी बुन्देलखण्ड के लिये नही, बल्कि आगरा की ओर रवाना कर किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि जब इस वाटर एक्सप्रेस को प्यासे बुन्देलखण्ड के लोगों की प्यास बुझाना ही नही था तो फिर उसे बुन्देलखण्ड के झांसी में 4 दिन तक क्यों खड़ा रखा? क्या वास्तव में केन्द्र सरकार इस हादसे के इंन्तजार में बैठी हुई थी, कि कब किसी की जान जाये और वह उसके बाद इस ट्रेन झांसी से हटाये। यदि यह ट्रेन केन्द्र और प्रदेश की सियासत न बनी होती तो इसे काफी समय पहले ही यहां से रवाना कर दिया गया होता। लेकिन ऐसा नही हुआ। आखिर कर इस वाटर एक्सप्रेस की सियासत की भेंट इंडियन एक्सप्रेस के फोटो जर्नलिस्ट रवि कनौजिया चढ़ ही गये।


इस प्रकार हुई फोटो जर्नलिस्ट रवि कनौजिया की मौत


दिल्ली से इंग्लिश न्यूज पेपर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टर श्वेता दत्ता अपने फोटो जर्नलिस्ट रवि कनौजिया के साथ एपी एक्सप्रेस से झांसी पहुंचीं। झांसी पहुंचने के बाद दोनों जर्नलिस्ट रेल याडऱ् में खड़ी वाटर एक्सप्रेस के पास पहुंचे। जहां श्वेता ने वाटर एक्सप्रेस पर न्यूज बनाना शुरु किया तो वहीं रवि कनौजिया ने फोटो लेना शुरु किया। इसी दौरान रवि कनौजिया टैंकर पर चढ़ गये और वहां से निकली ओएचई लाइन की चपेट में आ गये। जिससे उनकी मौके पर ही जलकर मौत हो गयी।


फोटो जर्नलिस्ट रवि कनौजिया की मौत की कीमत लगना हुई शुरु


केन्द्र और प्रदेश सरकार की सियासत के आगे हुयी फोटो जर्नलिस्ट रवि कनौजिया की मौत से जहां पूरे मीडिया परिवार में शोक की लहर है तो वहीं इस मौत को लेकर भी राजनीति कर रहीं सरकारों ने उसकी मौत की बोली लगाते हुये बीस-बीस लाख रुपये की मदद देने की घोषणा कर दी है। क्या राजनीति के आगे एक इन्सान की कीमत इतनी सस्ती होती है?

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