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कालाहांडी के बाद अब अंगुल में नज़र आया दाना मांझी

 shabahat |  2017-01-07 11:43:14.0


तहलका न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली. ओडिशा के अंगुल जिले में फिर कालाहांडी जैसी घटना देखने को मिली. गति धीबर के रूप में फिर एक दाना मांझी नज़र आया. दाना मांझी अपनी पत्नी की लाश को अपने कंधे पर लादकर दस किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर हुआ था तो गति धीबर अपनी पांच साल की बेटी की लाश को कंधे पर लेकर पांच किलोमीटर तक पैदल चलता रहा लेकिन उसे कोई ऐसा वाहन नहीं मिला जो उसकी बेटी की लाश को सहारा दे पाता. कंधे पर बेटी की लाश लेकर जा रहे गति धीबर को तमाम लोगों ने देखा और अपने मोबाइल फोन से उसकी तस्वीरें भी उतारीं और वीडियो भी बनाए लेकिन उसे कोई ऐसा नहीं मिला जो इस मुश्किल वक्त में उसका मददगार साबित होता.


गति धीबर को ओडिशा जैसे राज्य में अपनी बेटी की लाश को कंधे पर ढोना पड़ा जबकि ओडिशा सरकार गरीबों की सुविधा के लिये महाप्रयाण योजना का संचालन करती है. इस योजना में गरीबों को अपने रिश्तेदारों के शव ले जाने की मुफ्त सुविधा मिलती है. अंगुल के जिला प्रशासन का इस मुद्दे पर कहना है कि गति धीबर ने क्योंकि प्रशासनिक अधिकारियों को यह सूचना नहीं दी कि उसकी बेटी की मौत हो गई है और उसे अस्पताल से उसकी लाश ले जानी है इसलिये उसे गाड़ी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी. हालांकि प्रशासन यह स्वीकार करता है कि उससे भी चूक हुई कि एक बाप अपनी बेटी की लाश कंधे पर लादकर सड़क पर पैदल चलता रहा और उसे सूचना नहीं मिल पाई.

दरअसल गति धीबर की बेटी सुमी पल्लाहारा कम्युनिटी सेंटर में भर्ती थी और वहीं इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस अस्पताल के पास अपना शव वाहन नहीं है. यहाँ मौत होने पर जिला अस्पताल से शव वाहन मंगवाया जाता है. गति धीबर ने क्योंकि शव वाहन की मांग नहीं की इसलिये जिला अस्पताल से गाड़ी नहीं मंगवाई गई. धीबर गाड़ी की मांग करते तो उन्हें ज़रूर गाड़ी उपलब्ध करवाई जाती.

प्रशासन ने हालांकि इस शर्मनाक घटना के बाद अस्पताल के दो कर्मचारियों को लापरवाही बरतने के इल्जाम में हटा दिया गया है. मेडिकल आफीसर से इस सम्बन्ध में जवाब तलब किया गया है.

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