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चुनौतियों को स्वीकार करने वाले का नाम है राम नाईक : राजनाथ सिंह 

 Sabahat Vijeta |  2016-11-11 15:29:22.0

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  • राज्यपाल राम नाईक की पुस्तक का लोकार्पण

  • जनसेवा के कार्यों से जीवन में बहुत संतोष एवं समाधान मिला : राम नाईक

  • राज्यपाल के साथ काम करके बहुत कुछ सीखने को मिला : अखिलेश यादव 


तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक के संस्मरण संग्रह ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के हिन्दी, अंग्रेजी एवं उर्दू संस्करणों का लोकार्पण आज राजभवन के गांधी सभागार में हुआ. केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुए लोकार्पण समारोह में राज्यपाल राम नाइक ने कहा कि 9 नवम्बर को राष्ट्रपति भवन में उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, लोक सभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, वेंकैया नायडू और शरद पवार की मौजूदगी में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हालांकि इसका लोकार्पण कर दिया था लेकिन मुझे लगा कि जिन लोगों के बीच मैं काम करता हूँ उनके बीच भी इसका लोकार्पण हो. इसी वजह से राजभवन में भी इसका लोकार्पण समारोह रखा गया.



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राज्यपाल ने कहा कि यह पुस्तक दरअसल मेरी आत्मकथा नहीं है बल्कि यह मेरे राजनीतिक सफ़र के अनुभवों का संकलन है. महाराष्ट्र के एक अखबार में अपने 27 संस्मरण मैंने लिखे थे. यह उन्हीं संस्मरणों का संग्रह है.


राज्यपाल ने लोकार्पण समारोह में अपनी कई यादों को साझा किया. उन्होंने बताया कि राजनीति में आने के लिए मैंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया तो मेरी पत्नी कुंदा नाइक और दोनों पुत्रियों ने नौकरी करने का फैसला किया ताकि घर चलाने के लिए पैसों की दिक्क़त नहीं हो. उन्होंने याद किया कि संविधान बनने के 42 वर्ष बाद उन्हीं की पहल पर संसद में राष्ट्रगान गूंजा, कारगिल के शहीदों के परिजनों को पेट्रोल पम्प और गैस एजेंसी देने का फैसला किया. पेट्रोलियम मंत्री बने तो गैस कनेक्शन की एक करोड़ 70 लाख वेटिंग को खत्म कर तीन करोड़ और कनेक्शन बाँट दिए.


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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि चरैवेति! चरैवेति!! केवल एक पुस्तक नहीं बल्कि राज्यपाल राम नाईक के जीवन का मूल मंत्र है. राज्यपाल को उनकी पुस्तक की बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि यह पुस्तक राजनीति एवं सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए पथ-प्रदर्शक है. उन्होंने कहा कि राम नाइक का केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक क्षेत्र में भी बहुत इज्ज़त है. वह ईमानदार और अनुशासन प्रिय नेता रहे हैं. ओजस्वी, प्रखर और तथ्यपूर्ण भाषण देने की उनमें कला है. चुनौतियों को स्वीकार करना उन्हें बहुत अच्छी तरह से आता है.


लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मौके पर कहा कि इस पुस्तक में नये और कम उम्र के लोगों के लिये सीखने को बहुत कुछ है. उन्होंने कहा कि परिस्थितियां इंसान को किस तरह से गढ़ती हैं यह राम नाइक की किताब सिखाती है. पुस्तक मराठी के साथ-साथ हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू में है जिसकी वजह से ज्यादा से ज्यादा लोगों को पढ़ने का मौक़ा मिलेगा. उन्होंने कहा कि राज्यपाल के साथ काम करके उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला. मुख्यमंत्री ने राज्यपाल का इस बात के लिये धन्यवाद भी दिया कि उन्होंने अपने बहुमूल्य सुझावों से सरकार के लिये रास्ता भी निकाला है.



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इस मौके पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने कहा कि चरैवेति! चरैवेति!! वास्तव में पाठकों के लिये एक संदेश है. उन्होंने कहा कि जब कोई संस्मरण लिखता है तो निरपेक्ष नहीं रहता है. उसे लिखते वक्त वह पाठकों को कुछ सन्देश भी देने की कोशिश करता है. उन्होंने कहा कि यह पुस्तक राज्यपाल राम नाईक के जीवन की संघर्ष गाथा है जिसमें एक लक्ष्य निर्धारण करके उसकी पूर्ति करने के साथ-साथ दायित्व का बोध भी कराती है. सामाजिक कार्य करने वालों को बहुत कुछ त्याग करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि वास्तव में यह पुस्तक सीमित दायरे से बाहर निकलकर समाज सेवा करने के लिए भी प्रेरित करती है.


उत्तर प्रदेश में दो बार कार्यवाहक मुख्यमंत्री की भूमिका निभा चुके पूर्व मंत्री डॉ. अम्मार रिज़वी ने राज्यपाल राम नाईक को शुभकामना देते हुए कहा कि 82 साल की उम्र में वह आज भी सक्रिय हैं. वास्तव में वह राम नाईक नहीं राज नायक हैं. डॉ. अम्मार रिज़वी ने अपने भाषण में कई चुटकियाँ भी लीं. उन्होंने कहा कि समाज में औरतों की नज़र अपने शौहर की जेब पर होती है जबकि राम नाइक की नज़र कुंदा जी के पर्स पर रहती होगी. मुलायम सिंह यादव की प्रशंसा करते हुए डॉ. रिजवी ने कहा कि मुलायम तूफानों से टकराने का फन जानते हैं. तूफ़ान नहीं होता तो वह तूफ़ान पैदा करना भी जानते हैं. उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव जब समाजवादी पार्टी बना रहे थे तब उन्हें यह पता नहीं होगा कि एक दिन यह देश की इतनी बड़ी पार्टी बन जायेगी.


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डॉ. अम्मार रिज़वी ने कहा कि मैंने अपने सामजिक और राजनैतिक जीवन में 8 मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया. मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे तो मैं नेता विपक्ष था. मैं अखिलेश के साथ भी काम करना चाहता था. मेरा चुनाव जीतना तय था लेकिन 12 घंटे पहले अखिलेश उन इलाकों का दौरा करने चले गए जहाँ मैं नहीं चाहता था कि वह जाएँ.


राम नाइक की पुस्तक के लोकार्पण समारोह का लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ. अब्बास रजा नय्यर और दूरदर्शन के कार्यक्रम अधिशासी आत्म प्रकाश मिश्र ने शानदार संचालन किया. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, उत्तर प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डे, मंत्री अहमद हसन, मंत्री राजेन्द्र चौधरी, मंत्री गायत्री प्रजापति, पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद, लोकायुक्त संजय मिश्रा, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, हिन्दी-उर्दू के चुनिंदा साहित्यकार राज्यपाल की पत्नी श्रीमती कुंदा नाईक, पुत्रियाँ डॉ. निशिगंधा नाईक एवं श्रीमती विशाखा नाईक कुलकर्णी सहित परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे.

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