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भारत में रोज़ाना घट रहे हैं 550 रोज़गार

 Sabahat Vijeta |  2016-10-15 14:23:48.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. दिल्ली के एक गैर-सरकारी संगठन ‘प्रहार’ ने घटते रोजगार की विषम स्थिति से निपटने और सरकारों को चेताने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान शुरू करने की घोषणा की है. ‘प्रहार’ यानी पब्लिक रेस्पोंस अगेंस्ट हैल्पलैसनेस एंड एक्शन फॉर रिड्रेसल असहाय वर्ग की समस्याओं के समाधान खोजने की दिशा में निरंतर सक्रिय है. संस्था इस बात से चिंतित है कि जिस दर से आबादी बढ़ रही है, उस दर से रोजगार नहीं बढ़ पा रहे हैं. प्रहार के अध्यक्ष अभी राज मिश्र ने बताया कि भारत सरकार के श्रम ब्यूरो के पिछले चार वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रतिदिन करीब 550 रोजगार समाप्त हो रहे हैं. वर्ष 2050 तक भारत में 70 लाख नौकरियां ही बचेंगी, जबकि देश की आबादी में 60 करोड़ की संख्या और जुड़ जायेगी.


‘प्रहार’ के अध्यक्ष अभय राज मिश्र ने बताया कि ‘प्रहार’ की ओर से समाज के निम्रतम वर्ग के बीच एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह कराया जायेगा, जिससे कि उनकी नजर से समस्या और समाधान पर विचार संभव हो सके. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को सीधे उस वर्ग तक ले जाया जायेगा, जो रोजगार की समस्या से सीधे प्रभावित हो रहे हैं. इनमें किसान, छोटे दुकानदार, फैक्ट्रियों के काम करने वाले व अन्य लोग शामिल रहेंगे. उन्होने बताया कि हिन्दुस्तान में असंगठित क्षेत्र के लोगों की हालत सबसे ज्यादा खराब है. कृषि क्षेत्र के ज़रिये देश के 40 फीसदी लोगों को रोज़गार मिलता है लेकिन कृषि क्षेत्र में लगे लोगों की हालत अच्छी नहीं है.

उन्होंने कहा कि समाज के साधनहीन तबके की ओर से एक मांगपत्र तैयार किया जायेगा, जिनके सामने रोजीरोटी का संकट बना हुआ है. इसे योजनाकारों के समक्ष पेश किया जायेगा. समाधानों की पहचान की जायेगी और इन चुनौतियों से निपटने के लिए शिकायत सुनने वाले फोरम गठित किये जायेंगे. यह चुनौतियां एक खास वर्ग के कामगारों की हो सकती हैं या अर्थव्यवस्था के किसी विशेष अंग की भी हो सकती हैं. उन्होंने बताया कि असंगठित क्षेत्र के लोगों की दिक्क़तों को समझने के लिए देश के 7 राज्यों में अध्ययन चल रहा है.


अभय राज मिश्रा ने बताया कि भारत रोजी-रोटी के भयानक संकट से गुजर रहा है. जो भी विकास हो रहा है उसमें रोजगारों के अवसर नहीं हैं. लोगों और नीतिकारों की इच्छाएं चाहे जितनी बड़ी हों, हकीकत यह है कि वास्तव में देश में हर दिन रोजगार के अवसर कम होते जा रहे हैं. अमीरों और विदेशी निवेशकों पर आधारित विकास की नीति अपनाने का नतीजा यह है कि किसानों, छोटे दुकानदारों, ठेके पर काम करने वाले श्रमिकों आदि के रोजगार छिन रहे हैं.

उन्होंने कहा, 'भारत को पुराना तरीका अपनाते हुए खेती, असंगठित खुदरा व्यापार, सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों को बचाने की दिशा में काम करना चाहिए, क्योंकि देश में रोजी-रोटी का 99 प्रतिशत जुगाड़ इन्हीं सेक्टर्स से होता है. इन क्षेत्रों को सरकार की मदद चाहिए, न कि नियंत्रण. इक्कीसवीं सदी में भारत को स्मार्ट गांवों की जरूरत है, न कि स्मार्ट शहर की.

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