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बदलेगी सोच तभी मिलेगा नारियो को हक़

 Tahlka News |  2016-03-08 07:35:27.0

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अलका सिंह
तहलका न्यूज़ ब्यूरो
लखनऊ, 8 मार्च.


बदलता है मौसम
बदलते है हम
बदलेगी सोच
तभी मिलेगा
नारियो को हक़


जब देश आज़ाद हुआ तो आज़ादी सबके हिस्से में आई । पहले तो ये उत्सव के रूप में मनाई गई लेकिन धीरे-धीरे ये एकपक्षीय हो गई और आज़ादी के नाम पर उदंडता होने लगी जिसका खामियाजा महिलायों के हिस्से आया । दहेज़, बलात्कार, घरेलू हिंसा, कुप्रथाओं जैसे घ्रणित कृत्य आज़ादी की उसी अति का नतीजा है । तभी आज कुकृत्यो के पूरी तरह से बंद होने की आशंका ही नहीं होती इसका कारण एक सख्त कानून का न होना है ।


आज़ादी के बाद महिलाओं को न ही उनके हक़ मिले न ही सम्मान और सुविधाएं जिनकी वे हकदारी थी । बेशक महिलाओं को अपनी सीमाओं में रहकर कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए लेकिन खुद के हक़ को तिलांजलि देकर नहीं ।


महिलाओं की स्थिति / सभी  क्षेत्रों  में बदलती सूरत
तब से लेकर आज तक यानी प्राचीनकाल से लेकर आधुनिक काल तक काफी बदल चुकी है महिलाओं की स्थति । आधुनिक आंकड़ो के हिसाब से महिला साक्षरता 58 प्रतिशत है, विद्यालयों में बालिकाओं का पंजीकरण 47 प्रतिशत है, महिलाओं की कमाई 26 प्रतिशत है, सरकार में महिलाये 6 प्रतिशत है, शिशु मृत्यु दर ( प्रति एक हज़ार  ज़न्म पर ) 73, मातृ मृत्यु दर ( प्रति एक लाख ज़न्म पर ) 570 है ।


कम उम्र में शादी के कारण किशोरियों गर्भावस्था में, 550 मौते 1949 में हुई वही 2013 में 220 हुई ।


15 प्रतिशत महिलाए 50 के दशक में संगठित और असंगठित क्षेत्रों में नौकरिया करती है, 2010 में 65 प्रतिशत हो गया ।


55 प्रतिशत लड़कियां 50 के दशक में पांचवी कक्षा तक आते-आते पढाई छोड़ देती थी वहीँ अब 16 प्रतिशत हो गया है ।


महिलाओं के लिए योजनाएं
उज्ज्वला – यह योजना महिलाओं की तस्करी को रोकने एवं उन्हें पुनर्वासित करने के लिए है । गैर सरकारी संगठनो के ज़रिये यह योज़ना चलाई जा रही है लेकिन क्या सभी लापता लड़कियां मिल जाती है ।


इंदिरा गाँधी मातृत्व सहयोग योज़ना – गरीब महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान खुद और बच्चे की देखभाल के लिए चार हज़ार रुपये की नकद राशी प्रदान की जाती है । लेकिन आंकड़ो के मुताबिक केवल 13 करोड़ 40 लाख महिलाए लाभान्वित हुई है क्या बाकी की महिलाए अमीर है अगर नहीं तो उनका हक कहाँ है ?


स्वाधार योज़ना – फुटपाथ पर रहने वाली एवं बेघर महिलाओं के लिए यह योज़ना है । एसी महिलाओं को योज़ना के तहत अस्थाई आवास सुविधा मुहैया कराइ जाती है लेकिन अभी भी कई ऐसी महिलाए है जिन्हें ये हक़ नहीं मिला है ।


इसी तरह अनेको योजनाये जैसे – वीमेंस एम्पोवेर्मेंट एंड लाइवलीहुड प्रोग्राम, स्वाधार गृह स्कीम, जननी सुरक्षा योज़ना, राष्ट्रीय महिला कोष, सपोर्ट टू ट्रेनिंग एंड एम्प्लॉयमेंट प्रोग्राम फॉर वीमेंस, राजीव गांधी नेशनल क्रेच स्कीम फॉर दी चिल्ड्रेन ऑफ़ वर्किंग मदर, सेंट्रल सोशल वेलफेयर बोर्ड, वेर्किंग वीमेंस हास्टल इत्यादि चलाई जाती है लेकिन इन सभी योजनाओं का इतना हक नहीं मिल पाता महिलाओं को जितना मिलना चाहिए ।


उपर दिए गये अंशो में जहाँ एक ओर उनके हितो और विकास की बाते की जाती है और उसे अमल करने के लिए योजनाये भी बनाई जाती है लेकिन उन्हें उन योजनाओं का अशिक्षा, अज्ञानता व भेदभाव के कारण हक नहीं मिल पाता जो की मिलना चाहिए ।


जब महिलाओं को पूर्ण रूप से अपना हक़ मिलेगा आज़ादी मिलेगी तभी एक विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है जिस प्रकार एक बच्चे की परवरिश और एक आदमी की सफलता के पीछे एक महिला का ही हाथ होता है उसी प्रकार जब महिलाओं को उनका हक पूर्ण रूप से मिल जायेगा तो एक विकसित राष्ट्र का निर्माण हो जाएगा ।

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