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दादा मियां के 109 वें उर्स के तहत आज हुई परचम कुशाई

 Sabahat Vijeta |  2016-12-02 15:23:55.0

dada-miyan
लखनऊ. माल एवेन्यू स्थित दादा मियां की दरगाह पर आज 109 वें उर्स की तैयारियों के मद्देनज़र परचम कुशाई (झण्डा लहराना) का आयोजन किया गया. दादा मियां की दरगाह के सज्जादानशीन सबाहत हसन शाह ने बताया कि पैगम्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद साहब को दुनिया मे भेजने से पहले अल्लाह ने फरिश्तों को परचम लगाने का हुक्म दिया था. कि एक काबे की छत पर दूसरा दुनिया के आखिरी हिस्से पर और तीसरा उस घर की छत पर जिस घर में मोहम्मद साहब पैदा होने वाले थे.


उन्होंने कहा कि इस बात से परचम कुशाई की अहमियत और मान का अन्दाजा लगाया जा सकता है. हज़रत मोहम्मद साहब के दौर से पहले शुरू हुई परचम कुशाई की परम्परा को उनके बाद सूफी बुर्जुग, जो हजरत मोहम्मद के सच्चे शैदाई और जानशीन थे, उन्होंने इस रिवायत को आगे बढ़ाया और परचम की बुलन्दी को बाकी रखा.


इसी कदीम (प्राचीन) रस्म व रिवायत को बाकी रखने के लिए दादा मियॉ के उर्स के शुरूआत के मौके पर हर साल परचम कुशाई का आयोजन होता है. जिसमें हर जाति व धर्म के लोग उपस्थित होते हैं और दादा मियॉ के फैज़ान से मालामाल होते हैं. हर साल की तरह इस साल भी 21 से 25 रबीउल अव्वल (22 दिसम्बर से 26 दिसम्बर) तक होने वाले 109 वें उर्स मुबारक पर राष्ट्रीय एकता के आधार पर परम्परागत ढंग से परचम कुशाई का आयोजन हुआ इसी के साथ उर्स की सभी तैयारियां शुरू हो गई.


हर साल की तरह इस साल भी सूफी नूर मोहम्मद फसाहती कानपुर से अपने मुरीदों के साथ परचम लेकर आये. परचम कुशाई दरगाह के सज्जादा नशीन सबाहत हसन शाह की सदारत और फरहत मियॉ व मिस्बाह मियॉ की मौजूदगी मे सम्पन्न हुई.


परचम परचम कुशाई से पहले महफिले सम़ा का आयोजन हुआ जिसमें कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश किये. इससे पहले मस्जिद शाहे रज़ा के पेश इमाम हाफिज अब्दुल हन्नान फसाहती ने परचम कुशाई के महत्व के बारे में लोगों को बताया.

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